इंदौर से सामने आया भावुक वीडियो: कला किसी बड़े मंच की मोहताज नहीं होती, लेकिन जब हुनर को सही अवसर नहीं मिलता, तो वह आजीविका के लिए सार्वजनिक रास्तों पर अपनी आवाज ढूंढने को विवश हो जाता है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक दृष्टिबाधित (Visually Impaired) दंपति अपनी नन्हीं बेटी के साथ सड़क किनारे सुरीली आवाज में बॉलीवुड गीत गाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो ने जहां लाखों लोगों के दिलों को छुआ है, वहीं दिव्यांग कलाकारों को मुख्यधारा में अवसर न मिलने की सच्चाई पर भी बहस छेड़ दी है।
इंदौर में सड़क किनारे गाते दिखे दृष्टिबाधित पति-पत्नी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 4 नवंबर 2026 को यूजर @rameshofficial0 द्वारा 35 सेकंड का एक वीडियो साझा किया गया था। प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स (इंडिया टुडे व आज तक) के अनुसार, यह दृश्य इंदौर के एक व्यस्त बाजार का है।
वीडियो में दृष्टिबाधित व्यक्ति हाथ में माइक लिए 1994 की फिल्म 'दिलवाले' का प्रसिद्ध गीत "जीता था जिसके लिए" गाते दिख रहे हैं। उनके गायन की मिठास और सुरों की समझ दर्शाती है कि वे संगीत के मंझे हुए कलाकार हैं।
बेटी के साथ परिवार ने दी संगीत की प्रस्तुति
इस वीडियो का सबसे भावुक पहलू परिवार का आत्मसम्मान है। गायक के ठीक बगल में उनकी दृष्टिबाधित पत्नी खड़ी हैं, जो अपने पति का हौसला बढ़ाती हैं। वहीं, माता-पिता के बीच उनकी छोटी मासूम बेटी शांति से खड़ी होकर उनका हाथ थामे दिखती है।
व्यस्त बाजार से कई राहगीर बिना रुके गुजर रहे थे, फिर भी यह परिवार बिना किसी लाचारी के, पूरे स्वाभिमान से अपनी कला के दम पर आजीविका कमाने का सच्चा प्रयास कर रहा है। यह दृश्य भीख मांगने का नहीं, बल्कि मेहनत से जीने के जज्बे का प्रतीक है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
इंटरनेट पर वीडियो आते ही हजारों यूजर्स ने कलाकार की आवाज की सराहना की। कई संगीत प्रेमियों ने कहा कि इस गायक की आवाज में वह सच्चाई है, जो आज के ऑटो-ट्यून दौर में दुर्लभ है।
यूजर्स ने संगीतकारों, टीवी रियलिटी शोज और प्रशासन से अपील की कि इस परिवार को सम्मानित मंच दिया जाए। लोगों का मानना था कि सिर्फ सहानुभूति जताने से ज्यादा जरूरी इन कलाकारों के हुनर को आर्थिक और सामाजिक अवसर देना है।
दिव्यांग कलाकारों को बेहतर मंच क्यों जरूरी है?
दिव्यांगता अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिभा की कमी नहीं है, बल्कि सुलभ (Accessible) मंचों का अभाव है। दृष्टिबाधित कलाकारों को ऑडिशन या स्टूडियो तक पहुंचने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
सच्चा समावेशन तभी होगा जब समाज दिव्यांगता को लाचारी के बजाय विविधता के रूप में देखे। सरकार द्वारा प्रदत्त यूडीआईडी (UDID Card) व कल्याणकारी योजनाएं बुनियादी सहायता देती हैं, लेकिन सांस्कृतिक मंचों पर समान अवसर देना भी जरूरी है।
ऐसे कलाकारों की मदद कैसे की जा सकती है?
- कला का सम्मान करें: जब भी सड़क पर किसी दिव्यांग कलाकार को गाते देखें, तो केवल पैसे न डालें, बल्कि उनकी कला की सराहना करें।
- स्थानीय कार्यक्रमों में सशुल्क अवसर: विवाह समारोहों, सांस्कृतिक मेलों और उत्सवों में ऐसे स्ट्रीट आर्टिस्ट्स को सशुल्क परफॉर्मेंस का मौका दें।
- सत्यापित माध्यमों से सहयोग: सोशल मीडिया पर वित्तीय मदद करते समय कलाकारों की गरिमा का ध्यान रखें और केवल प्रमाणित माध्यमों से ही संपर्क करें।
- सुलभ ऑडिशन प्रक्रिया: संगीत अकादमियों और रियलिटी शोज को दिव्यांग कलाकारों के लिए बाधा-रहित ऑडिशन आयोजित करने चाहिए।
निष्कर्ष
इंदौर के इस दृष्टिबाधित परिवार की कहानी याद दिलाती है कि प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। जरूरत इस बात की है कि सोशल मीडिया की सहानुभूति जमीन पर ठोस अवसरों में बदले, ताकि सड़क किनारे गूंजने वाले ये अनमोल सुर बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना सकें।





